'बदला तय है'... ईरानी अखबार की कथित हिट लिस्ट में दुनिया के 11 बड़े नेता, ट्रंप नहीं बल्कि यह नेता बना नंबर-1 निशाना
तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद देश में बदले की मांग तेज होने के बीच तेहरान से प्रकाशित हमशहरी अखबार द्वारा साझा की गई एक कथित "हिट लिस्ट" ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। इस सूची में अमेरिका, इजरायल और कई यूरोपीय देशों के प्रमुख नेताओं की तस्वीरें प्रकाशित की गई हैं, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि, अब तक ऐसा कोई सार्वजनिक संकेत नहीं मिला है कि यह सूची ईरान सरकार की आधिकारिक "टारगेट लिस्ट" है। उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, यह सूची एक राज्य-संबद्ध अखबार द्वारा प्रकाशित की गई थी और इसे सरकार की आधिकारिक नीति के रूप में पुष्टि नहीं मिली है।
अंतिम संस्कार के बाद बदले की मांग हुई तेज
हाल ही में ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया। अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए और कई स्थानों पर अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ नारेबाजी भी देखने को मिली। ईरान के भीतर यह भावना खुलकर सामने आई कि खामेनेई की मौत का जवाब दिया जाना चाहिए।
ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी अपने शुरुआती सार्वजनिक संदेशों में बदले की बात कही। इसी माहौल के बीच हमशहरी अखबार द्वारा प्रकाशित ग्राफिक ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया।
क्या है कथित 'हिट लिस्ट'?
रिपोर्टों के अनुसार, हमशहरी अखबार ने अपने पहले पन्ने पर एक ग्राफिक प्रकाशित किया, जिसमें कई विदेशी नेताओं की तस्वीरें दिखाई गईं। इनमें कुछ नेताओं को नारंगी रंग की कैदी जैसी पोशाक में दिखाया गया, जबकि कुछ तस्वीरों पर निशाने का प्रतीक भी बनाया गया था। ग्राफिक के साथ बड़े अक्षरों में "बदला तय है" जैसा संदेश भी प्रकाशित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार, इस सूची में जिन नेताओं के नाम बताए गए हैं, उनमें शामिल हैं—
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों
इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ
कुछ रिपोर्टों में सूची में कुल 13 नाम बताए गए हैं, जबकि सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में अलग-अलग संख्या का दावा किया जा रहा है।
क्या यह ईरान सरकार की आधिकारिक सूची है?
यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस सूची को ईरान सरकार की आधिकारिक "हिट लिस्ट" घोषित नहीं किया गया है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने स्पष्ट किया है कि यह सूची राज्य-संबद्ध अखबार द्वारा प्रकाशित की गई थी, लेकिन इसे सरकार की औपचारिक नीति के रूप में पुष्टि नहीं मिली है।
यही वजह है कि विशेषज्ञ इस मामले को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं और सोशल मीडिया पर वायरल दावों को आधिकारिक सरकारी घोषणा मानने से बचने की बात कह रहे हैं।
यूरोपीय देशों से क्यों नाराज है ईरान?
ईरान लंबे समय से कई यूरोपीय देशों पर अमेरिका और इजरायल का समर्थन करने का आरोप लगाता रहा है।
तेहरान का आरोप है कि संघर्ष के दौरान कुछ यूरोपीय देशों ने उसके क्षेत्र पर हुए हमलों की पर्याप्त निंदा नहीं की। साथ ही ईरान का यह भी दावा है कि कुछ देशों ने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति देकर अप्रत्यक्ष सहयोग किया।
इसी कारण कथित सूची में केवल अमेरिका और इजरायल ही नहीं, बल्कि कई यूरोपीय नेताओं के नाम भी दिखाई दिए।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई तस्वीर
हमशहरी से जुड़ी यह ग्राफिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो गई। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे ईरान की आधिकारिक "हिट लिस्ट" बताकर साझा किया, जबकि कई विश्लेषकों ने स्पष्ट किया कि अखबार की सामग्री और सरकार की आधिकारिक नीति में अंतर हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामले में सोशल मीडिया पोस्ट को अंतिम सत्य मानने के बजाय आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय तथ्यों का इंतजार करना चाहिए।
बढ़ सकता है कूटनीतिक तनाव
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की भाषा और प्रतीकात्मक संदेश पहले से तनावपूर्ण पश्चिम एशियाई हालात को और जटिल बना सकते हैं।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पहले से ही गहरा अविश्वास बना हुआ है। ऐसे में किसी भी प्रकार की आक्रामक बयानबाजी या प्रतीकात्मक धमकी से कूटनीतिक तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि अभी तक सूची में शामिल अधिकांश देशों की ओर से इस विशेष प्रकाशन पर औपचारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है।
Iran's "Hamshahri" newspaper publishes the Islamic Republic's retaliatory targets. 🇮🇷📰💥 pic.twitter.com/kYwHhABM1m
— IRGC (@IRGC_Press) July 11, 2026
विशेषज्ञों की राय
विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य-संबद्ध मीडिया द्वारा प्रकाशित सामग्री को गंभीरता से देखा जाता है, लेकिन उसे स्वतः सरकारी नीति नहीं माना जा सकता।
उनका मानना है कि यदि किसी सूची को सरकार की आधिकारिक मंजूरी प्राप्त होती है, तो सामान्यतः उसके संबंध में संबंधित सरकारी संस्थानों या विदेश मंत्रालय की ओर से स्पष्ट बयान सामने आता है। फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद ईरान में बदले की मांग और पश्चिम विरोधी बयानबाजी तेज हुई है। इसी माहौल में राज्य-संबद्ध अखबार हमशहरी द्वारा प्रकाशित कथित "हिट लिस्ट" ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सूची में अमेरिका, इजरायल और यूरोप के कई शीर्ष नेताओं की तस्वीरें शामिल होने से मामला और संवेदनशील हो गया है।
हालांकि, अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस सूची को ईरान सरकार की आधिकारिक "हिट लिस्ट" के रूप में पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इस मामले को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयानों और सत्यापित तथ्यों का इंतजार करना आवश्यक है। पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव के बीच ऐसी खबरों का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव काफी व्यापक हो सकता है।

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